ncert history chapter 3 class 6 notes

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CHAPTER – 3

भोजन : संग्रह से उत्पादन तक

आज हम फसलों को उगाकर अपने लिए अनाज पैदा कर लेते है लेकिन यह प्रक्रिया हमेशा से ऐसी नहीं रही। शुरू में मनुष्य ने धीरे-धीरे इस प्रक्रिया को सीखा होगा और भविष्य के लिए इसके उत्पादन  करने के  लिए बीजों को संभाल कर रखा होगा।

खेती और पशुपालन की शुरुआत:-

खेती और पशुपालन की शुरुआत एकदम से नहीं हुई। ऐसा माना जाता है कि दुनिया की जलवायु बदलती रही और साथ ही लोग जिन वनस्पति और पशुओं का भोजन के रूप में इस्तेमाल करते थे, वह भी बदलते रहे। जैसे लोग सोचते हैं कि खाने योग्य वनस्पति कहां से मिल सकती हैं, बीज कैसे अपने डंठल से टूट कर गिरे होंगें, गिरे हुए बीजों का अंकुरण और उनसे पौधे का निकलना आदि।

इसी तरह से उन्होंने पौधे को देखकर देखभाल करनी शुरू कर दी होगी। चिड़ियों और जानवरों से उनकी सुरक्षा की होगी, ताकि वे ठीक से बढ़ सके। उनका बीज पक सके इसी प्रकार धीरे-धीरे कृषक बन गए होंगे। मनुष्य ने जिन जंगली जानवर को पालना शुरू किया होगा, वे कुत्ते के जंगली पूर्वज थे। धीरे-धीरे मनुष्य ने अपनी जरूरत के अनुसार भेड़ ,बकरी, गाय व सूअर जैसे जानवरों को अपने घर के नजदीक रखना शुरू किया होगा जिससे उन्हें मांस दूध खाने जैसे पदार्थ मिल सके।

बसने की प्रक्रिया

लोगों द्वारा पौधे उगाने और जानवरों की देखभाल करने को बसने की प्रक्रिया का नाम दिया गया है। बसने की प्रक्रिया पूरी दुनिया में धीरे-धीरे चलती रही। यह करीब 12000 साल पहले शुरू हुई। आज हम जो भोजन करते हैं वो इसी बसने की प्रक्रिया की वजह से हैं। कृषि के लिए अपनाई गई सबसे प्राचीन फसलों में गेहूं तथा जौ आते हैं, उसी तरह सबसे पहले पालतू बनाए गए जानवरों में कुत्ते के बाद भेड़-बकरी आते हैं।

स्थायी जीवन की ओर

पुरातत्त्वविदों को कुछ पुरास्थलों पर झोपड़ियां और घरों के निशान मिले हैं। जैसे की बुर्ज़होम (वर्तमान कश्मीर में) के लोग गड्ढे के नीचे घर बनाते थे जिन्हें गर्तवास कहा जाता है। इन घरों में उतरने के लिए सीढ़ियां होती थी। इससे उन्हें ठंड के मौसम में सुरक्षा मिलती होगी पुरातत्त्वविदों को लोगों के घरों के अंदर और बाहर दोनों ही जगह पर आग जलाने की साक्ष्य मिले हैं। ऐसा लगता था कि लोग मौसम के अनुसार घर के अंदर या बाहर खाना पकाते होंगे। बहुत सारी जगहों से पत्थर के औज़ार भी मिले हैं।

कुछ साक्ष्य हमें नवपाषाणयुगीन भी मिले हैं। इनमें वे औजार भी है जिनकी धार को ओर अधिक पैना करने के लिए उन पर पाॅलिश चढ़ाई जाती थी। ओखली और मूसल का प्रयोग अनाज और वनस्पतियों से प्राप्त अन्य चीजों को पीसने के लिए किया जाता था। कुछ औजार हड्डियों से भी बनाए जाते थे। नवपाषाण युग के पुरास्थलों से कई प्रकार के मिट्टी के बर्तन मिलें हैं। बर्तनों का उपयोग चीजों को रखने के लिए किया जाता था। ऐसा माना जाता है कि लोग बर्तनों का प्रयोग खाना बनाने के लिए भी करने लगे होंगे। लोग कपड़े भी बुनने लगे थे। इसके लिए कपास जैसे आवश्यक पौधे भी उगाए होंगे।

आरंभिक कृषकों और पशुपालकों के बारे में साक्ष्य :-

अनाज और हड्डियां

पुरास्थल

गेहूं, जौ, भेड़, बकरी, मवेशी मेहरगढ़ (आधुनिक पाकिस्तान)
चावल ,जानवरों की हड्डियों के टुकड़े कोल्डिहवा (आधुनिक उत्तर प्रदेश)
चावल, मवेशी (मिट्टी पर खुरों के निशान) महागढ़ा( आधुनिक उत्तरप्रदेश)
गेहूं और दलहन गुफ़क्राल (आधुनिक कश्मीर)
गेहूं और दलहन, कुत्ते, मवेशी, भैंस, भेड़, बकरी बुर्जहोम (आधुनिक कश्मीर)
गेहूं, हरे चने,जो भैंस, बैल चिरांंद (आधुनिक बिहार)
ज्वार-बाजरा, मवेशी ,भेड़ ,बकरी, सूअर हल्लूर (आधुनिक आंध्र प्रदेश)
काला चना, ज्वार- बाजरा, मवेशी, भेड़, सूअर पैय्यमपल्ली (आधुनिक आंध्रप्रदेश)
जिन जगहों पर अनाज तथा हड्डियों के अवशेष मिले है., ये उनमें से सिर्फ कुछ ही हैं। 

मेहरगढ़ में जीवन-मृत्यु :-

  • मेहरगढ़ ईरान जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण रास्ते में, बोलन दर्रे के पास एक हरा भरा समतल स्थान है। संभवत: मेहरगढ़ के लोगों ने ही सबसे पहले जौ, गेहूं उगाना और भेड़ बकरी पालन सीखा।
  • मेहरगढ़ से ही पुरातत्वविदों को, खुदाई में विभिन्न प्रकार के जानवरों की हड्डियां मिली है। इनमें सबसे पहले के स्तरों से हिरण तथा सूअर जैसे जंगली जानवरों की हड्डियां भी शामिल हैं। उसके बाद के स्तरों से भेड़ और बकरियों की हड्डियां ज्यादा मिली हैं।
  • मेहरगढ़ में इसके अलावा चौकोर तथा आयताकार घरों के अवशेष भी मिले हैं। प्रत्येक घर में चार या उससे ज्यादा कमरे मिलें हैं, जिनमें से कुछ भंडारण के काम आते होंगे।
  • सगे-संबंधियों की मृत्यु के बाद लोग उनके प्रति सम्मान जताते हैं। लोगों की आस्था है कि मृत्यु के बाद भी जीवन होता है। इसलिए कब्रों में मर्तकों के साथ कुछ सामान भी रखे जाते थे।
  • यंहा एक ऐसी कब्र भी मिली हैं जिसमें एक मृतक के साथ एक बकरी को भी दफ़नाया गया था। संभवतः इसे परलोक में मृतक के खाने के लिए रखा गया होगा।

दाओजली हेडिंग:-

  • यह पुरास्थल चीन और म्यांमार की ओर जाने वाले रास्ते में ब्रह्मपुत्र की घाटी की एक पहाड़ी पर है।
  • यहां से हमें मुसल और खराल जैसे पत्थरों के उपकरण मिले हैं जिससे हमें पता चलता है कि यहां के लोग भोजन के लिए अनाज उगाते थे।
  • यहां से जेडाइट पत्र भी मिला है जो संभवत: चीन से आया होगा।
  • इसके अतिरिक्त इस पुरास्थल से काष्ठाश्म (अति प्राचीन लकड़ी ,जो सख्त होकर पत्थर बन गई है) के औजार और बर्तन भी मिले हैं।

अन्यत्र

नवपाषाण युग के सबसे प्रसिद्ध पुरास्थलों में एक चताल ह्यूक तुर्की में है। यहां दूर-दराज स्थानों से कई चीजे लाई जाती थी और उनका उपयोग किया जाता था।जैसे सीरिया से लाया गया चकमक पत्थर ,लाल सागर की कौड़ियां तथा भूमध्य सागर की सीपीयां। ध्यान रहे कि उस समय तक पहिए वाले वाहन का विकास नहीं हुआ था। लोग सामान खुद या जानवरों की पीठ पर लादकर ले जाया करते थे।

      नोट्स :-

  1. अनाज के उपयोग:-  बीज के रूप में, खाद्द के रूप में, उपहार के रूप में और भंडारण के रूप में।
  2. जनजाति:–  प्राय: जनजाति के लोग छोटी-छोटी बस्तियों में रहते हैं। ज्यादातर परिवार एक दूसरे से संबंधित होते हैं और इस                       तरह की परिवारों के समूह मिलकर जनजाति का निर्माण करते हैं।

हमने ncert history chapter 3 class 6 notes के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान की है, उम्मीद करते हैं कि आपको अवश्य ही पसंद आया होगा।

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